September 25, 2026
BIHAR

बेल्डीह क्लब में गुरुवार को दो दिवसीय सीआईआरकॉन-2026 (सर्कुलैरिटी कॉन्फ्रेंस) का शुभारंभ हुआ। इस वर्ष सम्मेलन की थीम ‘इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप के माध्यम से वैलोराइजेशन की पुनर्कल्पना’ रखी गई है। सम्मेलन में उद्योग, शिक्षाविदों, अनुसंधान संस्थानों और स्टार्टअप्स के विशेषज्ञों ने सतत संसाधन उपयोग, औद्योगिक अपशिष्ट के पुनर्चक्रण तथा सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने पर विचार-विमर्श किया।
सम्मेलन का आयोजन टाटा स्टील लिमिटेड की ओर से इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स (आईआईएम), जमशेदपुर चैप्टर, सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला और इंडियन सिरेमिक सोसाइटी के सहयोग से किया जा रहा है। उद्घाटन समारोह में पद्म भूषण डॉ. वीके सारस्वत, पूर्व सदस्य नीति आयोग, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। टाटा स्टील के उपाध्यक्ष (कॉरपोरेट सर्विसेज) डीबी सुंदर रामम और एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक डॉ. गौतम सूत्रधार विशिष्ट अतिथि थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता टाटा स्टील के आईबीएमडी के एग्जीक्यूटिव-इन-चार्ज दीपांकर दासगुप्ता ने की। सम्मेलन के संयोजक भार्गव धवाला ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
इस मौके पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. वीके सारस्वत ने जलवायु परिवर्तन और कार्बन फुटप्रिंट से उत्पन्न चुनौतियों का उल्लेख करते हुए सतत प्रौद्योगिकियों तथा नवाचार आधारित समाधानों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सर्कुलैरिटी से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए तकनीकी विकास और नए दृष्टिकोण आवश्यक हैं।
टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट कॉरपोरेट सर्विसेज डीबी सुंदर रामम ने संसाधन दक्षता और सतत औद्योगिक कार्यप्रणालियों के प्रति कंपनी की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने कोयले और उससे जुड़े उप-उत्पादों, जिसमें राख भी शामिल है, के 100 प्रतिशत उपयोग पर कंपनी के फोकस की जानकारी दी। वहीं, डॉ. गौतम सूत्रधार ने देश में क्रिटिकल मेटल्स की बढ़ती मांग को देखते हुए रिकवरी, पुनः उपयोग और जिम्मेदार निस्तारण की तीन-चरणीय रणनीति अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास के साथ बढ़ती संसाधन खपत के बीच अपशिष्ट का उपयोग, संसाधन दक्षता और सतत तकनीकें महत्वपूर्ण हैं।
आईआईएम जमशेदपुर चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. अतनु रंजन पाल के समन्वयन में ‘द डिफिकल्ट लास्ट माइल ऑफ सर्कुलैरिटी : कैन एवरी इंडस्ट्रियल वेस्ट फाइंड ए होम?’ विषय पर पैनल चर्चा हुई। इसमें औद्योगिक अपशिष्ट के प्रभावी उपयोग और उसके लिए व्यावहारिक समाधान विकसित करने पर चर्चा की गई। दो दिवसीय सम्मेलन में करीब 200 प्रतिभागी और विभिन्न क्षेत्रों के हितधारक शामिल हो रहे हैं। सम्मेलन का उद्देश्य औद्योगिक उप-उत्पादों, अपशिष्ट और द्वितीयक संसाधनों को तकनीकी नवाचार तथा उद्यमिता के माध्यम से उपयोगी और मूल्यवान सामग्री में बदलने की संभावनाओं पर विचार करना है।
क्रिटिकल मिनरल्स से बैटरी रीसाइक्लिंग तक चर्चा
सम्मेलन में खतरनाक अपशिष्ट प्रबंधन, संसाधन पुनर्प्राप्ति, भारतीय कोयले में दुर्लभ मृदा तत्व, खनिज मूल्य श्रृंखला में संसाधन दक्षता, अर्बन माइनिंग, क्रिटिकल मिनरल रिकवरी तथा प्रदूषण और संसाधन पुनर्प्राप्ति के अर्थशास्त्र पर प्लेनरी व्याख्यान आयोजित किए जा रहे हैं।

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