July 14, 2026
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बिहार के वैशाली जिले में पुलिस का बेहद सख्त और ताबड़तोड़ ऐक्शन देखने को मिला। रविवार को बिदुपुर थाना क्षेत्र के राजसन गांव में रास्ते के मामूली विवाद को लेकर एक फौजी और उसके पिता की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस दोहरे हत्याकांड को अंजाम देने वाले मुख्य आरोपी और मृतक के भतीजे जगदीश राय को पुलिस ने 24 घंटे के भीतर एनकाउंटर में दबोच लिया। दिलावरपुर हेमती गाछी के पास हुई इस पुलिस मुठभेड़ में आरोपी जगदीश राय के दोनों पैरों में गोली लगी है, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। रविवार को हुई इस दिल दहला देने वाली वारदात के बाद से ही पुलिस की कई टीमें आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही थीं। सोमवार को पुलिस को बिदुपुर के दिलावरपुर हेमती गाछी इलाके में आरोपी जगदीश राय के छिपे होने की सूचना मिली। जब पुलिस टीम ने उसे घेरने का प्रयास किया, तो जवाबी कार्रवाई में पुलिस को गोलियां चलानी पड़ीं। आरोपी के दोनों पैर में गोली लगी है और फिलहाल अस्पताल में उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
10 साल पुराने रास्ते के विवाद में बहाया खून
मृतक मुनारिक राय (52 वर्ष) और उनके भतीजे जगदीश राय के बीच पिछले 10 वर्षों से जमीन और केला बागान में बने मकान के रास्ते को लेकर तनातनी चल रही थी।
रविवार सुबहजब मुनारिक राय और उनके फौजी बेटे जितेंद्र कुमार राय घर से 300 मीटर दूर निकले, तभी जगदीश राय और उसके साथियों ने हमला कर दिया।
जगदीश ने मुनारिक पर तीन और पिता को बचाने दौड़े सेना के सिग्नल कोर के जवान जितेंद्र पर एक गोली दाग दी। मुनारिक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि जितेंद्र ने अस्पताल में। बहनोई के अंतिम संस्कार से लौटते ही किया मर्डर
मृतक फौजी जितेंद्र कुमार राय 9 जुलाई को अपने बहनोई दिनेश कुमार राय की करंट लगने से हुई मौत की सूचना पाकर छुट्टी लेकर घर आया था। वो 9 जुलाई को अपने बहनोई के दाह संस्कार में व्यस्त रहा और 10 जुलाई को घर वापस लौटा था। जैसे ही वह घर पहुंचा, आरोपी जगदीश राय अपने पूरे परिवार के साथ पुराने विवाद को लेकर दोबारा झगड़ा करने लगा, जो अंततः रविवार को इस दोहरे हत्याकांड में बदल गया।
घटना से पहले मुनारिक राय इस भूमि विवाद को लेकर थाने में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराना चाहते थे, लेकिन स्थानीय लोगों ने पंचायत के जरिए मामला शांत करा दिया था। परिजनों का ये भी आरोप है कि सेना के जवान ने झगड़े की सूचना स्थानीय बिदुपुर थाने को पहले ही दे दी थी, लेकिन पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अगर, समय रहते पुलिस ने कार्रवाई की होती, उसके और उसके पिता की जान बचाई जा सकती थी।

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