बिहार के मुजफ्फरपुर में साइबर फ्रॉड से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया. साइबर टीम, बिहार STF, DIU और जिला पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया गया है, जो इंस्टाग्राम आईडी और फर्जी सिम के माध्यम से आम लोगों की निजी जानकारी चुराकर उसे API के जरिए विदेशों में बेचता था. पुलिस ने गिरोह के 4 सदस्यों को गिरफ्तार किया. जिनमें एक आरोपी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर, एक दरभंगा और दो मुजफ्फरपुर के रहने वाले हैं. गिरोह का बांग्लादेश कनेक्शन भी सामने आया. लगातार बढ़ रहे साइबर फ्रॉड के मामलों के बाद मुजफ्फरपुर के वरीय पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा के निर्देश पर सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी के अनुश्रवण में एक विशेष टीम का गठन किया गया. इस टीम का नेतृत्व साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार कर रहे थे, जबकि एसटीएफ की टीम भी समानांतर रूप से इस मामले पर काम कर रही थी. तकनीकी और मानवीय सूचना के आधार पर पुलिस ने सबसे पहले अहियापुर थाना क्षेत्र से ऋषभ कुमार नामक एक युवक को गिरफ्तार किया. शुरुआती पूछताछ में खुलासा हुआ कि उसके 3 अन्य सहयोगी भी इस गिरोह में शामिल हैं, जिनके साथ मिलकर वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर फ्रॉड करता था. ऋषभ की निशानदेही पर पुलिस ने यूपी के गाजीपुर से दीपक चौधरी, बिहार के दरभंगा जिले के जाले थाना इलाके से सुधांशु कुमार और मुजफ्फरपुर के हथौड़ी थाना क्षेत्र से साहिल कुमार को गिरफ्तार किया. पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे पहले अवैध तरीके से आम लोगों का डाटा चुराते थे और फिर इनकी निजी जानकारी विदेशी लोगों को बेच देते थे.इसके लिए वे इंस्टाग्राम आईडी और फर्जी सिम कार्ड का इस्तेमाल करते थे. पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मास्टर माइंड रिषभ के एक बैंक अकाउंट को भी फ्रिज किया है, जिसमें लगभग 4 लाख रुपए जमा मिले हैं. उसके पास से 4 मोबाइल और एक आई पैड भी बरामद किया, जिसमे इंस्टाग्राम पर कई अवैध चैनल और अन्य लिंक मिले. गिरफ्तार अन्य 3 शातिरों के पास से भी 3 मोबाइल बरामद किये गए. पुलिस यह जांच कर रही है कि आम लोगों का निजी डाटा किन-किन देशों के लोगों को बेचा गया. प्रारंभिक जांच में बांग्लादेश से गिरोह के कनेक्शन की पुष्टि हो चुकी है.
