पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के शुद्धिकरण अभियान के तहत एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहाँ २०२५ की तुलना में मतदाताओं की कुल संख्या में १०% की गिरावट आई है। चुनाव आयोग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, अब तक लगभग ७.५ लाख नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। यह प्रक्रिया मुख्य रूप से फर्जी नामांकनों, मृत व्यक्तियों के नामों और एक से अधिक स्थान पर दर्ज मतदाताओं को हटाने के लिए चलाई गई थी। आयोग का लक्ष्य २०२६ के चुनावी चक्र से पहले एक सटीक और पारदर्शी डेटाबेस तैयार करना है।
अधिकारियों के अनुसार, इस भारी कटौती का मुख्य कारण जमीनी स्तर पर किया गया गहन भौतिक सत्यापन है। बूथ स्तर के अधिकारियों ने घर-घर जाकर डेटा की जांच की, जिसमें बड़ी संख्या में विसंगतियां पाई गईं। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह छंटनी किसी को मताधिकार से वंचित करने के लिए नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए अनिवार्य थी। आने वाले हफ्तों में यह संख्या और बढ़ सकती है क्योंकि सत्यापन का अंतिम चरण अभी भी जारी है, जिससे यह हाल के वर्षों में मतदाता सूची का सबसे बड़ा ‘क्लीन-अप’ बन गया है।
