पटना के जंक्शन से शुरू हुई वह खौफनाक दास्तां, जिसने एक बार फिर पुलिसिया चौकसी और समाज की संवेदनाओं पर सवालिया निशान लगा दिए हैं, अब अपने अंजाम की ओर बढ़ रही है। मोतिहारी की एक 15 वर्षीय मासूम, जो मामूली पारिवारिक अनबन के बाद विजयवाड़ा से घर लौट रही थी, उसे पटना जंक्शन पर विकास कुमार नाम के भक्षक ने मदद का झांसा देकर जाल में फंसाया।
यह महज दुष्कर्म नहीं, बल्कि एक सुनियोजित अगवा ( और सामूहिक दरिंदगी का मामला है। आरोपी मासूम को सफेद रंग की अर्टिगा कार में बिठाकर करीब 48 घंटों तक शहर की सड़कों पर शिकार बनाकर घुमाते रहे। कोतवाली से लेकर वीवीआईपी सचिवालय और गर्दनीबाग जैसे इलाकों तक, यह कार 50 किलोमीटर तक फर्राटे भरती रही, लेकिन सुरक्षा का दम भरने वाली पुलिस को भनक तक न लगी।
दानापुर रेल पुलिस ने इस मामले के मुख्य कड़ियों को जोड़ते हुए तीसरे आरोपी अरविंद कुमार उर्फ भोक्रम को दबोच लिया है। इससे पहले विकास और पवन को पहले ही सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। पुलिस ने वारदात में प्रयुक्त अर्टिगा कार को जब्त कर लिया है। तलाशी के दौरान कार से कुछ संदिग्ध दवाइयां और नशीले पदार्थ मिले हैं, जिन्हें एफएसएल (FSL) जांच के लिए भेजा गया है।
रेल डीएसपी कंचन राज के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। पुलिस अब इस मामले में स्पीडी ट्रायल चलाकर दरिंदों को फांसी के फंदे या उम्रकैद तक पहुंचाने की तैयारी में है। साक्ष्यों को सुरक्षित कर लिया गया है ताकि अदालत में ‘गुनाह’ साबित करने में कोई कसर न रहे।
