पायलट चरण में 9,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का वितरण करने के बाद कोटक महिंद्रा बैंक ने कॉर्पोरेट ग्राहकों के लिए तत्काल वर्किंग कैपिटल डिमांड लोन का विस्तार किया है। यह इस बात का संकेत है कि अल्पकालिक कर्ज तक तेज पहुंच अब कंपनियों की रोजमर्रा की फंडिंग जरूरतों को पूरा करने का तरीका बदलने लगी है। यह सुविधा पात्र कंपनियों को डिजिटल प्रक्रिया के जरिए चंद सेकंड में वर्किंग कैपिटल लोन लेने का मौका देती है। इससे वे मैन्युअल प्रक्रियाएं और बैंकिंग की समय-सीमाएं खत्म हो जाती हैं जो पहले लोन की सीमा मंजूर होने के बावजूद रकम मिलने में देरी कराती थीं। कोटक महिंद्रा बैंक की कॉर्पोरेट एंड ट्रांजैक्शन बैंकिंग की प्रेसिडेंट और हेड अनु अग्रवाल ने कहा, “ग्राहक अब वर्किंग कैपिटल तब लेते हैं जब जरूरत पड़ती है, न कि बैंकिंग की समय-सीमाओं के हिसाब से योजना बनाकर।”
वर्किंग कैपिटल लोन कंपनियों द्वारा सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले बैंकिंग उत्पादों में से हैं जो इन्वेंटरी खरीद, वेंडर भुगतान और वेतन वितरण जैसी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करते हैं। पहले से मंजूर होने के बावजूद इन तक पहुंच हमेशा तय कामकाजी घंटों और परिचालन प्रक्रियाओं पर निर्भर रहती थी। यह तरीका अब बदलने लगा है। कोटक ने अपने कॉर्पोरेट डिजिटल प्लेटफॉर्म फिन (एफवायएन) यानी फॉर योर नीड्स के जरिए कंपनियों को चंद सेकंड में वर्किंग कैपिटल लोन लेने की सुविधा दी है। कंपनियां लोन की राशि और अवधि जैसी बुनियादी जानकारी भरकर अनुरोध करती हैं, जिसके बाद ब्याज दर तय करने और जांच की प्रक्रिया डिजिटल तरीके से पूरी होती है और रकम लगभग तुरंत खाते में आ जाती है। सुश्री अग्रवाल ने कहा, “हमने वितरण का समय कई घंटों से घटाकर कुछ सेकंड कर दिया है।” उन्होंने यह भ्ज्ञी कहा कि इससे कंपनियां परिचालन जरूरत पड़ते ही उससे निपट सकती हैं, बजाय इसके कि केवल देरी से बचने के लिए अतिरिक्त बफर बनाकर रखें।
बैंक के अनुसार शुरुआती उपयोग के पैटर्न से व्यवहार में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। कंपनियां अब दिन में देर से भी वर्किंग कैपिटल ले रही हैं और पुरानी समय-सीमाओं का हिसाब नहीं लगातीं। अनु अग्रवाल ने कहा, “पहले ग्राहकों को तय घंटों से पहले अनुरोध भेजना होता था। पात्र ग्राहकों के लिए अब यह बाधा नहीं रही।”
