पटना के पीएमसीएच में एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी लापरवाही सामने आई है। नालंदा की 82 वर्षीय बुजुर्ग महिला को समय पर स्ट्रेचर नहीं मिलने से उनकी हालत बिगड़ गई। इमरजेंसी में पहुंचने के बाद भी उन्हें तुरंत सुविधा नहीं मिल सकी। इस देरी ने इलाज को और गंभीर बना दिया।
परिजन स्ट्रेचर के लिए अस्पताल में इधर-उधर दौड़ते रहे। करीब 30 मिनट तक एंबुलेंस खड़ी रही, लेकिन मरीज को अंदर नहीं ले जाया जा सका।
इस दौरान महिला की हालत लगातार बिगड़ती रही। समय पर इलाज नहीं मिलने से वे बेहोश हो गईं। काफी देर बाद जब महिला को एक्स-रे के लिए ले जाया गया, तब तक उनकी स्थिति नाजुक हो चुकी थी। बताया गया कि वहीं उनकी हालत और खराब हो गई और वे कोमा में चली गईं। इस घटना ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजन इसे सीधे तौर पर लापरवाही बता रहे हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मरीज की बहू उसी अस्पताल में सीनियर नर्स है। इसके बावजूद उन्हें कोई विशेष मदद नहीं मिल सकी।
परिजनों का आरोप है कि पहचान बताने के बाद भी स्टाफ का रवैया नहीं बदला। यह स्थिति सिस्टम की गंभीर खामी को दर्शाती है। परिजनों ने अस्पताल कर्मियों और सुरक्षा गार्डों पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मदद करने के बजाय उन्हें टालमटोल किया गया।
बार-बार आग्रह करने के बावजूद कोई त्वरित कार्रवाई नहीं हुई। इससे परिजनों में आक्रोश बढ़ गया। जब स्थिति बिगड़ी और परिजनों ने हंगामा किया, तब प्रशासन सक्रिय हुआ। आनन-फानन में स्ट्रेचर की व्यवस्था कर मरीज को भर्ती किया गया।
फिलहाल महिला का इलाज मेडिसिन वार्ड के बेड नंबर 21 पर चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।
परिजनों ने पूरे मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि लापरवाही के कारण मरीज की जान जोखिम में पड़ी।
यह घटना अस्पताल की व्यवस्थाओं पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है।
