कांफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के राष्ट्रीय संयुक्त महासचिव सुरेश सोंथालि ने सरकार से ई-कॉमर्स व क्विक कॉमर्स कंपनियों की बढ़ती मनमानी और अनुचित व्यापारिक प्रथाओं पर तत्काल और कठोर कार्रवाई करने की मांग की. संसद से पारित जन विश्वास विधेयक 2.0 का स्वागत करते हुए कैट के उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में यह कदम विश्वास-आधारित शासन व व्यापार सुगमता को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल है जिससे इससे देश के व्यापारियों और उद्यमियों में विश्वास बढ़ेगा तथा एक सकारात्मक कारोबारी माहौल तैयार होगा।
उन्होंने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ विदेशी पूंजी से संचालित ई-कॉमर्स कंपनियां भारत के व्यापारिक वातावरण को असंतुलित कर रही हैं और देश के 9 करोड़ से अधिक व्यापारियों के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर रही हैं, जो देश की आपूर्ति श्रृंखला और रोजगार का प्रमुख आधार हैं।
उन्होंने कहा कि प्रिडेटरी प्राइसिंग, अत्यधिक छूट (डीप डिस्काउंटिंग), डार्क पैटर्न्स, मार्केटप्लेस के नाम पर इन्वेंट्री आधारित मॉडल, चुनिंदा विक्रेताओं को प्राथमिकता और डार्क स्टोर्स का तेजी से विस्तार—ये सभी प्रथाएं न केवल प्रतिस्पर्धा के खिलाफ हैं, बल्कि छोटे और मध्यम व्यापारियों के अस्तित्व के लिए खतरा बन चुकी हैं. उन्होंने कहा कि ऐसी कंपनियों को भारत में मनमानी करने की अनुमति नहीं दी जाए।
