टाटा समूह के स्वामित्व वाली एयर इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। ७ अप्रैल २०२६ को एयर इंडिया द्वारा की गई आधिकारिक घोषणा के अनुसार, विल्सन ने २०२४ में ही चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को पद छोड़ने की अपनी इच्छा जता दी थी। जुलाई २०२२ में ५ साल के अनुबंध पर नियुक्त हुए विल्सन का कार्यकाल वैसे तो २०२७ में समाप्त होना था, लेकिन उन्होंने एक वर्ष पहले ही पदमुक्त होने का निर्णय लिया है। वे तब तक अपने पद पर बने रहेंगे जब तक कि उनके उत्तराधिकारी की नियुक्ति नहीं हो जाती, ताकि नेतृत्व का हस्तांतरण सुचारू रूप से हो सके।
विल्सन का यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब एयर इंडिया भारी वित्तीय घाटे और परिचालन संबंधी चुनौतियों से जूझ रही है। वित्त वर्ष २०२६ में कंपनी का घाटा ₹२०,००० करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है, जो शुरुआती अनुमानों से कहीं अधिक है। इसके अलावा, पिछले साल अहमदाबाद में हुए विमान हादसे और पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र बंद होने के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की बढ़ती लागत ने भी कंपनी पर दबाव बढ़ाया है। अपने विदाई संदेश में विल्सन ने पिछले चार वर्षों में चार एयरलाइनों के सफल विलय और ६०० विमानों के विशाल ऑर्डर जैसे महत्वपूर्ण मील के पत्थर का उल्लेख किया। फिलहाल एयर इंडिया के बोर्ड ने एक पैनल गठित किया है जो कंपनी के अगले ‘महाराजा’ यानी नए सीईओ की तलाश करेगा।
