एसोसिएशन ऑफ झारखंड अनएडेड प्राइवेट एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस (एजेयूपीईआई) ने राज्य सरकार के शिक्षा अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत नामांकन लेने वाले गरीब व वंचित वर्ग (बीपीएल) के छात्रों की फीस प्रतिपूर्ति बंद करने के फैसले का कड़ा विरोध किया है। एसोसिएशन का कहना है कि इस निर्णय से हजारों जरूरतमंद बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ सकता है. सरकार के इस कदम को मनमाना, भेदभावपूर्ण व कानूनी रूप से अस्थिर करार देते हुए चेतनावद है कि जरूरत पडऩे पर जल्द ही कोर्ट का दरवाजा भी खटखटायेंगे। शुक्रवार को नरभेराम हंसराज इंग्लिश स्कूल में एसोसिएशन ऑफ झारखंड अनएडेड प्राइवेट एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस (एजेयूपीईआई) की ओर से आयोजित प्रेसवार्ता में एसोसिएशन के चेयरपर्सन नकुल कमानी ने कहा कि आरटीई अधिनियम कोई दान या उपकार नहीं, बल्कि सरकार की संवैधानिक और कानूनी जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि 27 अगस्त 2009 को लागू आरटीई अधिनियम के तहत 6 से 14 वर्ष के बच्चों को मुफ्त व अनिवार्य शिक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी है, जिसमें केन्द्र और राज्य दोनों की भागीदारी होती है।
उन्होंने 11 मई 2011 के झारखंड सरकार के गजट का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने न केवल इस अधिनियम के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जतायी थी, बल्कि 3 से 4 वर्ष के बच्चों के प्रवेश को भी इसके दायरे में शामिल किया था. उन्होंने कहा कि माध्यमिक शिक्षा निदेशक के 6 जुलाई 2011 के पत्र के बाद राज्य सरकार ने बीपीएल छात्रों के लिए प्रति छात्र 425 रुपये प्रति माह (5,100 रुपये प्रतिवर्ष) की दर से प्रतिपूर्ति शुरू की थी. उन्होंने कहा कि आरटीई अधिनियम के अनुसार प्रतिपूर्ति की राशि या तो राज्य की ओर से प्रति छात्र किए गए वास्तविक खर्च (जो लगभग 3,000 रुपये प्रति माह है) के बराबर होनी चाहिए या स्कूल की फीस के बराबर, जो भी कम हो. उन्होंने कहा कि जमशेदपुर के निजी स्कूल एक छात्र पर करीब 1300 से 1500 रुपये प्रतिमाह जो स्कूल के अनुसार होता है खर्च करते हैं, लेकिन हमें केवल 425 रुपये दिए गए, जिसे हमने बच्चों के हित में ‘अंडर प्रोटेस्ट’ स्वीकार किया।
उन्होंने कहा कि दिसम्बर, 2020 से स्थिति और गंभीर हो गई है जब सरकार ने भुगतान बंद कर दिया. उन्होंने कहा कि यह नियम जमशेदपुर के स्कूलों पर लागू किया गया है जिसमें सरकार ने तर्क दिया था कि टाटा स्टील की लीज पर स्थित स्कूलों को ‘सरकारी सहायता प्राप्त’ श्रेणी में माना जाना चाहिए और इसलिए वे आरटीई के तहत प्रतिपूर्ति के पात्र नहीं हैं. इस संबंध में झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के 14 दिसंबर 2020 के पत्र का हवाला दिया गया. उन्होंने कहा कि जमशेदपुर का कोई भी स्कूल झारखंड सरकार से मुफ्त जमीन या वित्तीय सहायता नहीं लेता. स्कूल टाटा स्टील से लीज पर जमीन लेते हैं और उसका वार्षिक किराया देते हैं. टाटा स्टील राज्य सरकार नहीं है, इसलिए इन स्कूलों को सरकारी सहायता प्राप्त करना पूरी तरह से भ्रामक है. एसोसिएशन के उपाध्यक्ष ज्ञान तनेजा ने कहा कि जल्द ही इस मामले को लेकर कोर्ट जाएंगे. इस मौके पर इस मौके चेयरपर्सन नकुल कमानी, उपाध्यक्ष ज्ञान तनेजा, सचिव डा. श्रीकांत नायर, कोषाध्यक्ष आर.के. झुनझुनवाला, राजीव तलवार, शरद चंद्रन नायर मौजूद थे।
