डॉलर के मुकाबले रुपया 24 नवंबर को 90 के करीब पहुंच गया। 21 नवंबर को डॉलर के मुकाबले यह 89.49 के लेवल पर बंद हुआ था। डॉलर की डिमांड बढ़ने का असर रुपया पर पड़ा है। डॉलर के मुकाबले रुपये में तेज गिरावट का असर शेयर बाजार पर पड़ता है, क्योंकि इंपोर्टेड इनफ्लेशन का खतरा बढ़ जाता है। इनपुट कॉस्ट भी बढ़ जाती है।
डॉलर की ज्यादा मांग से लिक्विडिटी में बना है गैप
सीआर फॉरेक्स एडवाइजर्स का कहना है कि डॉलर की ज्यादा खरीदारी से लिक्विडिटी में गैप बना है। आरबीआई जो 88.80 के लेवल को डिफेंड कर रहा था, वह फिलहाल हस्तक्षेप करता नहीं दिख रहा है। इससे ट्रेडर्स के स्टॉपलॉस ट्रिगर हुए हैं। आम तौर पर रुपये में तेज गिरावट का असर शेयर बाजार पर पड़ता है।
मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स पर पड़ सकता है असर
उन्होंने कहा कि रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच जाने से विदेशी इनवेस्टर्स डिफेंसिव हो जाते हैं, क्योंकि उतारचढ़ाव बढ़ने से डॉलर-एडजस्टेड रिटर्न घट जाता है। इसका मिडकैप और स्मॉलकैप स्टॉक्स पर ज्यादा पड़ सकता है, जहां वैल्यूएशंस ज्यादा है। चॉइस वेल्थ के अक्षत गर्ग ने भी कहा कि रुपये में कमजोरी से मार्केट पर शॉर्ट टर्म में असर पड़ता है। इससे FIIs की तरफ से कुछ बिकवाली भी दिख सकती है।
स्टॉक मार्केट्स पर शॉर्ट टर्म में दिख सकता है असर
गर्ग ने हालांकि कहा कि इंडिया की स्ट्रक्चरल स्टोरी पर किसी तरह का निगेटिव असर नहीं पड़ा है। इसलिए जब तक इकोनॉमी की सेहत अच्छी है, मार्केट में गिरावट थोड़े समय के लिए होगी। जियोजित इनवेस्टमेंट्स के वीके विजयकुमार का मानना है कि रुपये में गिरावट का ज्यादा असर मार्केट पर नहीं पड़ेगा। खासकर तब जब वैल्यूएशन में नरमी आई है। उनका मानना है कि दुनिया में AI स्टॉक्स से इनवेस्टर्स का मोहभंग हो रहा है। ऐसे में इनवेस्टर्स जल्द इंडियन मार्केट में खरीदारी शुरू कर सकते हैं, जिससे रुपये को सपोर्ट मिलेगा।
