भागलपुर को कोसी-सीमांचल समेत देश के विभिन्न हिस्सों से जोड़ने वाला ऐतिहासिक विक्रमशिला सेतु अब सुरक्षा चुनौती का सामना कर रहा है। जानकारी के अनुसार, पुल के तीन पिलरों के प्रोटेक्शन वाल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इनमें से एक पिलर का प्रोटेक्शन वाल पूरी तरह टूट चुका है, दूसरे का प्रोटेक्शन वाल लटक रहा है और तीसरे का भी स्थिति चिंताजनक है। पुल के पिलरों पर प्रोटेक्शन वाल के टूटने से सीधे तौर पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इसका समय पर निवारण नहीं हुआ तो पुल के अस्तित्व पर खतरा बढ़ सकता है। एनएच के अधिकारियों ने नाव के जरिए पुल का निरीक्षण कर मुख्यालय को स्थिति की जानकारी दी है। अधिकारियों के अनुसार, जल्द ही एक कंसल्टेंट एजेंसी को नियुक्त किया जाएगा, जो पिलरों, प्रोटेक्शन वाल, एक्सपेंशन ज्वाइंट और बियरिंग की जांच करेगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर स्टीमेट तैयार होगा और मुख्यालय की स्वीकृति के बाद टेंडर प्रक्रिया पूरी कर दुरुस्ती का काम शुरू होगा। एनएच के कार्यपालक अभियंता साकेत कुमार रौशन ने कहा कि “वर्तमान में पिलरों की वास्तविक स्थिति की जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट मोर्थ को भेजी जाएगी और उनके निर्देशानुसार दुरुस्ती का कार्य कराएंगे। हालांकि फिलहाल प्रोटेक्शन वाल के क्षतिग्रस्त होने से पुल पर कोई प्रत्यक्ष खतरा नहीं है।” सेवानिवृत कार्यपालक अभियंता मनोरंजन कुमार पांडेय ने बताया कि प्रोटेक्शन वाल पिलर के वेल कैप के ऊपर बनाए जाते हैं और इनका वजन लगभग 1000 किलोग्राम यानी 25 मन होता है। यह भारी बरसात, तेज करंट और आंधी के समय पानी की धार को डायवर्ट करता है। उन्होंने कहा कि टूटकर लटक रहे प्रोटेक्शन वाल पिलर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि आंधी या बाढ़ के दौरान पानी के तेज करंट, भारी नाव या सामानों के टकराने से पिलर में दरार या क्रेक पड़ सकता है। बार-बार चोट लगने पर पिलर हिल सकता है और मिट्टी खिसकने से बालू निकल सकता है। इसलिए प्रोटेक्शन वाल का निर्माण तत्काल आवश्यक है।भागलपुर में गंगा नदी के बीच में हैं तीनों पिलर, यहां काम बंद
