February 13, 2026
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भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने तीन दिन चली बैठक के बाद शुक्रवार को रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने घोषणा करते हुए बताया कि रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर ही कायम रहेगा।
गवर्नर ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत स्थिति में बनी हुई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहेगी, जो पिछले वर्ष से अधिक है। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद निजी उपभोग और स्थिर निवेश ने आर्थिक विकास को मजबूती प्रदान की है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने व्यापार समझौतों, जीएसटी युक्तिकरण और मजबूत कृषि उत्पादन के मद्देनजर अगले वित्त वर्ष (2026-27) की पहली तथा दूसरी तिमाही के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के अनुमान को शुक्रवार को बढ़ाकर क्रमश: 6.9 और सात प्रतिशत कर दिया।
आरबीआई ने दिसंबर में 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही के लिए वास्तविक जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि 6.7 प्रतिशत और जुलाई-सितंबर के लिए 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया था। पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अनुमान अप्रैल में अगली मौद्रिक नीति में घोषित किए जाएंगे, जिसमें नए जीडीपी एवं उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) श्रृंखला को अद्यतन आधार वर्ष (2024) के साथ शामिल किया जाएगा।
मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, ” भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार बेहतर राह पर बनी हुई है और 2025-26 में वास्तविक जीडीपी के 7.4 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज करने की उम्मीद है जो पिछले वर्ष की तुलना में कहीं अधिक है।
वैश्विक चुनौतियों के बीच निजी उपभोग और स्थिर निवेश ने वृद्धि को सहारा दिया।” उन्होंने कहा कि 2026-27 में आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी रहने की उम्मीद है। कृषि गतिविधियों को जलाशयों के स्वस्थ स्तर, मजबूत रबी बुवाई और फसलों की स्थिति में सुधार से समर्थन मिलेगा।
इसके अलावा, कॉरपोरेट क्षेत्र के प्रदर्शन में सुधार और असंगठित क्षेत्र में बनी गति से विनिर्माण गतिविधियों को बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि निर्माण क्षेत्र की वृद्धि मजबूत रहने के आसार हैं और घरेलू मांग के मजबूत होने के साथ सेवा क्षेत्र में भी मजबूती बनी रहेगी। गवर्नर ने मांग पक्ष पर कहा कि 2026-27 में निजी उपभोग की गति बनी रहने की उम्मीद है जबकि ग्रामीण मांग स्थिर रहेगी। उन्होंने कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) युक्तिकरण और नरम मौद्रिक नीति के निरंतर समर्थन से शहरी उपभोग में सुधार होगा।
मल्होत्रा ने कहा, ” उच्च क्षमता उपयोग, तेज होती बैंक ऋण वृद्धि, अनुकूल वित्तीय परिस्थितियां और बुनियादी ढांचे पर सरकार का निरंतर जोर निवेश गतिविधियों को प्रोत्साहन देगा।” गवर्नर ने कहा कि हाल में संपन्न भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) और प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के साथ कई अन्य व्यापार करार मध्यम अवधि में निर्यात को समर्थन देंगे। इसके अलावा, केंद्रीय बजट में घोषित कई उपाय भी वृद्धि के लिए अनुकूल रहने की संभावना है।

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