प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की असम यात्रा के दौरान राज्य के विपक्षी दलों ने भारतीय जनता पार्टी भाजपा की नीतियों और चुनाव पूर्व किए गए वादों पर तीखे सवाल उठाए हैं। विपक्षी दलों, विशेष रूप से ‘असोम जातीय परिषद’ और कांग्रेस ने प्रधानमंत्री से पूछा है कि बड़े बांधों के निर्माण, विदेशी नागरिकों के निर्वासन और बाढ़ नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भाजपा ने ‘यू-टर्न’ क्यों लिया। विपक्ष का आरोप है कि वर्ष २०१४ के लोकसभा चुनाव से पहले मोदी ने सभी विदेशियों को वापस भेजने का वादा किया था, लेकिन इसके विपरीत सरकार नागरिकता संशोधन कानून लेकर आई। इसके अलावा, राज्य की ६ प्रमुख समुदायों—अहोम, मोरान, मोटोक, चुटिया, कोच राजबंशी और चाय जनजातियों—को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने का वादा भी पिछले २० वर्षों से अधूरा है।
विपक्ष ने भ्रष्टाचार, अवैध कोयला खनन और सिंडिकेट राज को खत्म करने में भाजपा की विफलता पर भी सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस नेताओं ने तंज कसते हुए कहा कि वर्ष २०२१ के विधानसभा चुनावों से पहले गृह मंत्री अमित शाह ने ५ वर्षों में बाढ़ की समस्या सुलझाने का आश्वासन दिया था, लेकिन इस बार भी वे वही वादा दोहरा रहे हैं। विपक्ष का दावा है कि सरकार असम समझौते की धारा ६ को लागू करने और स्थानीय लोगों को संवैधानिक सुरक्षा प्रदान करने में विफल रही है। उनका आरोप है कि भाजपा विकास के वादों के बजाय धार्मिक आधार पर लोगों को विभाजित कर सत्ता में बने रहने का प्रयास कर रही है।
