भाकपा-माले (लिबरेशन) ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की संभावित चर्चाओं पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पार्टी का मानना है कि यदि नीतीश कुमार राज्य की राजनीति छोड़कर केंद्र का रुख करते हैं, तो इससे बिहार में एक राजनीतिक शून्य पैदा होगा, जिसका फायदा उठाकर भाजपा राज्य की राजनीति पर पूरी तरह से “वैचारिक कब्जा” कर सकती है। वामपंथी दल ने चिंता जताई है कि यह कदम बिहार की समाजवादी और धर्मनिरपेक्ष राजनीति के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है।
पार्टी नेतृत्व के अनुसार, नीतीश कुमार का यह कदम भाजपा के उस एजेंडे को आसान बना देगा जिसमें वह क्षेत्रीय दलों को कमजोर कर अपनी विचारधारा को थोपना चाहती है। सीपीआईएमएल (लिबरेशन) ने इसे बिहार की जनता के जनादेश के साथ एक तरह का समझौता बताया है। इस बयान ने बिहार के राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है, जहाँ विपक्षी दल आगामी चुनावों और नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाओं को देखते हुए अपनी रणनीति को पुनर्गठित करने में जुटे हैं।
