टी-२० विश्व कप २०२६ में वेस्टइंडीज के खिलाफ संजू सैमसन की ९७ रनों की नाबाद पारी को हमेशा याद रखा जाएगा, लेकिन इस बड़ी सफलता की नींव तीन दिन पहले जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच में रखी गई थी। उस मैच में सैमसन ने केवल १५ गेंदों में २४ रनों की एक छोटी मगर बेहद महत्वपूर्ण पारी खेली थी। इस पारी ने न केवल सैमसन को आत्मविश्वास दिया, बल्कि भारतीय टीम को वह लय और आक्रामकता भी प्रदान की जिसकी उसे टूर्नामेंट के नॉकआउट चरण से पहले सख्त जरूरत थी। विशेषज्ञों का मानना है कि उन १५ गेंदों ने ही भारत के विश्व कप अभियान में नई जान फूंकी और टीम को जीत की राह पर वापस लाया।
कोलकाता के ईडन गार्डन्स में वेस्टइंडीज के खिलाफ १९६ रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए सैमसन ने ५० गेंदों में १२ चौकों और ४ छक्कों की मदद से ९७ रन बनाए। यह टी-२० विश्व कप के लक्ष्य का पीछा करते हुए किसी भी भारतीय बल्लेबाज द्वारा बनाया गया सर्वोच्च स्कोर है, जिसने विराट कोहली के ८२ रनों के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया। सैमसन ने अपनी इस सफलता का श्रेय कड़े अभ्यास और मानसिक मजबूती को दिया है। उनकी इस शानदार पारी की बदौलत भारत ने न केवल यह मैच जीता, बल्कि शान के साथ सेमीफाइनल में भी अपनी जगह पक्की कर ली।
