आगामी विधानसभा चुनाव की आहट के बीच भारत निर्वाचन आयोग की फुल बेंच रविवार देर रात महानगर कोलकाता पहुंच गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की उच्चस्तरीय टीम तीन दिवसीय दौरे पर बंगाल पहुंची है। राज्य में कदम रखते ही मुख्य चुनाव आयुक्त का पहला पड़ाव मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के राजनीतिक गढ़ कालीघाट में होगा। सोमवार सुबह मंदिर में मां काली के दर्शन और पूजा-अर्चना के बाद आयोग राज्य की चुनावी तैयारियों और राजनीतिक दलों के साथ बैठकों के मैराथन दौर की शुरुआत करेगा। निर्वाचन आयोग का यह दौरा प्रशासनिक से कहीं अधिक रणनीतिक माना जा रहा है। सोमवार सुबह करीब 10 बजे राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ औपचारिक बैठक शुरू होने से पहले ज्ञानेश कुमार कालीघाट मंदिर जाएंगे। गौरतलब है कि मंदिर दर्शन का कार्यक्रम प्रारंभिक आधिकारिक सूची में शामिल नहीं था, जिसे अंतिम समय में जोड़ा गया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विवादों के बीच शक्तिपीठ से अपने दौरे की शुरुआत कर मुख्य चुनाव आयुक्त एक आध्यात्मिक और कड़ा संदेश देना चाहते हैं। इसके पश्चात दोपहर में आयोग विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ रूबरू होगा, जहाँ मतदाता सूची और सुरक्षा व्यवस्था जैसे संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा संभावित है।
आयोग का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब राजभवन, नवान्न (सचिवालय) और निर्वाचन सदन के बीच संबंध अपने सबसे निचले स्तर पर हैं। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस लगातार आयोग पर हमलावर रही हैं। मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक मंचों से मुख्य चुनाव आयुक्त के लिए वैनिश कुमार जैसे शब्दों का प्रयोग किया है, तो वहीं आयोग को टॉर्चर कमीशन और उसके व्यवहार को हिटलर जैसा करार दिया है। ऐसे में ज्ञानेश कुमार की टीम के सामने न केवल स्वतंत्र चुनाव सुनिश्चित करने की चुनौती है, बल्कि राज्य सरकार के साथ उपजे अविश्वास की खाई को पाटने का भी जिम्मा है। सोमवार को राजनीतिक दलों से फीडबैक लेने के बाद, शाम को आयोग पुलिस विभाग के आला अधिकारियों के साथ कानून-व्यवस्था की समीक्षा करेगा। मंगलवार का दिन प्रशासनिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण होगा। इस दिन मुख्य चुनाव आयुक्त राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और जिलाधिकारियों के साथ लंबी बैठक करेंगे।
सूत्रों की मानें तो आयोग उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दे रहा है जहाँ से हिंसा या मतदाता सूची में गड़बड़ी की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। मंगलवार को ही मुख्य चुनाव आयुक्त के बेलूड़ मठ जाने का भी कार्यक्रम तय है। अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले फुल बेंच का यह दौरा बंगाल की चुनावी दिशा तय करेगा। आयोग का प्रयास है कि चुनाव की घोषणा से पूर्व ही प्रशासनिक मशीनरी को पूरी तरह निष्पक्ष और चुस्त-दुरुस्त कर दिया जाए। जिस तरह से पिछले कुछ दिनों में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य से रिपोर्ट तलब की है और आयोग की टीम स्वयं जमीन पर उतरी है, उससे साफ है कि इस बार बंगाल में चुनावी प्रक्रिया पर दिल्ली की पैनी नजर रहने वाली है।
