टाटा स्टील के सीईओ एवं प्रबंध निदेशक टीवी नरेंद्रन ने कहा कि वैश्विक व्यापार में अस्थिरता और स्टील कीमतों पर दबाव के बावजूद टाटा स्टील ने पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर वित्तीय प्रदर्शन किया है। उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय कर्मचारियों और यूनियन नेतृत्व के सामूहिक प्रयासों को दिया। सेंटर फॉर एक्सीलेंस, जमशेदपुर में नववर्ष के अवसर पर केक कटिंग के बाद नागरिकों, कर्मचारियों, यूनियन नेताओं और मीडिया को संबोधित करते हुए नरेंद्रन ने सभी को नए साल की शुभकामनाएं दीं और 2025 को वैश्विक स्टील उद्योग के लिए चुनौतीपूर्ण वर्ष बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर व्यापार लगातार संरक्षणवादी होता जा रहा है। कई देश अपने बाजारों को बचाने के लिए बाधाएं खड़ी कर रहे हैं। जहां टाटा स्टील इंडिया पर इसका सीमित प्रभाव पड़ा है, वहीं यूरोप में हमारी इकाइयों पर अमेरिका को स्टील निर्यात पर लगाए गए शुल्क का असर पड़ा है।”नरेंद्रन ने बताया कि चीन की अर्थव्यवस्था, विशेषकर निर्माण क्षेत्र में कमजोर मांग के कारण, लगातार दूसरे वर्ष चीन से 10 करोड़ टन से अधिक स्टील का निर्यात हुआ है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर दबाव बढ़ा है। उन्होंने कहा, “इस वजह से भारतीय उत्पादकों के लिए निर्यात कठिन हो गया और घरेलू स्टील कीमतें पिछले पांच वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गईं, जो अंतरराष्ट्रीय कीमतों से लगभग 3,000 रुपये कम रहीं।”
इन चुनौतियों के बावजूद उन्होंने कहा कि टाटा स्टील का वित्तीय प्रदर्शन पिछले वर्ष से बेहतर रहा है। “यह भारत और यूरोप में हमारे कर्मचारियों की कड़ी मेहनत और प्रबंधन तथा यूनियनों के बीच मजबूत साझेदारी का परिणाम है, जो कठिन समय में भी कंपनी के दीर्घकालिक हित में समाधान निकालने में मदद करती है. विकास योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए नरेंद्रन ने कहा कि टाटा स्टील जमशेदपुर में मूल्य संवर्धन पर लगातार ध्यान दे रही है। उन्होंने आईएसडब्ल्यूपी परिसर में स्थापित अत्याधुनिक लॉन्ग प्रोडक्ट्स कॉम्बी मिल का उल्लेख किया, जो 2,000 करोड़ रुपये की परियोजना है, साथ ही टिनप्लेट डिवीजन के 2,000 करोड़ रुपये के विस्तार को बोर्ड की मंजूरी मिलने की जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि टाटा स्टील ने टाटा ब्लूस्कोप स्टील में ब्लूस्कोप की हिस्सेदारी का अधिग्रहण कर लिया है, जिससे सीआरएम बारा प्लांट अब पूरी तरह टाटा स्टील की इकाई बन गया है। उन्होंने अन्य स्थानों पर विस्तार का भी उल्लेख किया, जिसमें कलिंगानगर में क्षमता 3 से बढ़ाकर 8 मिलियन टन करना, बिरामुंडी और विलाचल में संचालन, विलाचल में 4 मिलियन टन का विस्तार, लुधियाना में मार्च तक शुरू होने वाला नया संयंत्र और राजस्थान में दिल्ली के पास ई-कचरा रीसाइक्लिंग सुविधा शामिल है।
सामुदायिक जुड़ाव पर बात करते हुए नरेंद्रन ने कहा कि चुनौतीपूर्ण दौर के बावजूद टाटा स्टील सीएसआर गतिविधियों पर लगातार काम कर रही है और झारखंड तथा ओडिशा में परियोजनाओं के लिए अन्य कॉरपोरेट्स से भी सीएसआर फंड आकर्षित करने में सफल रही है। हालांकि, उन्होंने शहर के विकास में नागरिकों की सक्रिय भूमिका की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “जमशेदपुर देश के सबसे स्वच्छ शहरों में से एक है और वर्तमान में तीसरे स्थान पर है। सवाल यह है कि हम नंबर एक क्यों नहीं बन सकते? इसके लिए नागरिकों और टाटा स्टील को मिलकर काम करना होगा।” सड़क सुरक्षा पर चिंता जताते हुए नरेंद्रन ने कहा कि गलत दिशा में वाहन चलाने जैसी असुरक्षित आदतें सुरक्षा संस्कृति को कमजोर करती हैं। उन्होंने कहा, “यदि शहर में सुरक्षा की संस्कृति नहीं बदलेगी तो संयंत्र के भीतर इसे लागू करना भी कठिन हो जाता है। यह जीवन और चोटों से जुड़ा मामला है और अनावश्यक जोखिम दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं।” उन्होंने मीडिया से भी इस विषय पर जागरूकता फैलाने में सहयोग की अपील की। उन्होंने कर्मचारियों में बढ़ती स्वयंसेवी भावना की भी सराहना की। “स्वयंसेवा से कर्मचारी समुदाय को बेहतर समझ पाते हैं और सार्थक योगदान दे पाते हैं। यह देखकर खुशी होती है कि अधिक से अधिक कर्मचारी आगे आ रहे हैं,” उन्होंने कहा। अपने संबोधन के अंत में नरेंद्रन ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं और स्टील खपत वाले देशों में शामिल है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं को लेकर सतर्क रहना जरूरी है। उन्होंने सभी को एक बार फिर सुरक्षित और खुशहाल नववर्ष की शुभकामनाएं दीं।
