आदित्य धर द्वारा निर्देशित फिल्म ‘धुरंधर’ हाल के वर्षों में उभरती ‘गवर्नमेंट-एम्बेडेड’ (सरकार-प्रेरित) फिल्म निर्माण शैली का एक सटीक उदाहरण पेश करती है। यह लेख विश्लेषण करता है कि कैसे यह फिल्म पूरी तरह से वर्तमान सरकार के राजनीतिक दृष्टिकोण और राष्ट्रवाद की परिभाषा के साथ तालमेल बिठाती है। फिल्म की कहानी केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक खास तरह के विमर्श को बढ़ावा देती है जो सत्ता के ‘घर में घुसकर मारने’ जैसे नारों और आक्रामक विदेश नीति का समर्थन करती है। इसमें वास्तविक जीवन के पात्रों और दस्तावेजी फुटेज का उपयोग इस तरह किया गया है कि सिनेमाई कल्पना और सरकारी एजेंडे के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है।
लेख के अनुसार, फिल्म ‘धुरंधर’ मुख्य रूप से पड़ोसी देश के खिलाफ प्रतिशोध और आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों को एक खास चश्मे से दिखाती है। फिल्म में अजय सान्याल (आर. माधवन द्वारा अभिनीत) जैसे पात्रों का चित्रण राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल जैसे वास्तविक व्यक्तित्वों से प्रेरित लगता है, जो एक ऐसी राजनीतिक इच्छाशक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं जो उन्हें दुश्मनों के सफाए की पूरी छूट दे सके। यह फिल्म न केवल पिछली सरकारों की सुरक्षा नीतियों को कमजोर या निष्क्रिय दिखाती है, बल्कि हिंसा के बेलगाम चित्रण के माध्यम से दर्शकों के भीतर उग्र देशभक्ति की भावना को जगाने का प्रयास भी करती है, जो इसे केवल एक फिल्म नहीं बल्कि एक वैचारिक प्रचार का जरिया बनाता है।
