जनवरी के महीने को ‘सर्वाइकल कैंसर जागरूकता माह’ के रूप में मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को इस गंभीर बीमारी के प्रति सचेत करना है। स्त्री रोग विशेषज्ञों के अनुसार, यदि इस कैंसर का पता पहली अवस्था में चल जाए, तो इसके ठीक होने की दर सौ प्रतिशत तक हो सकती है। हालांकि, जागरूकता की कमी के कारण कई महिलाएं जांच में देरी कर देती हैं। मुख्य रूप से ‘ह्यूमन पेपिलोमा वायरस’ (एचपीवी) इस कैंसर का कारण बनता है, लेकिन धूम्रपान भी एक बहुत बड़ा जोखिम कारक है क्योंकि यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देता है, जिससे वायरस का प्रभाव और भी घातक हो जाता है।
बचाव के लिए विशेषज्ञों ने नियमित स्क्रीनिंग और टीकाकरण पर विशेष जोर दिया है। नौ से चौदह वर्ष की आयु की लड़कियों के लिए एचपीवी टीका सबसे प्रभावी माना जाता है, जो भविष्य में कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम कर देता है। इसके अलावा, पच्चीस वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को समय-समय पर ‘पैप स्मियर’ और ‘एचपीवी’ परीक्षण कराते रहना चाहिए। जीवनशैली में सुधार, सुरक्षित यौन व्यवहार और तंबाकू के सेवन से दूरी बनाकर इस बीमारी को हराना पूरी तरह संभव है, जिससे हजारों महिलाओं के जीवन को सुरक्षित किया जा सकता है।
