बंगाल में निपा वायरस के संदिग्ध मामलों ने राज्य स्वास्थ्य विभाग और केंद्र सरकार की चिंता बढ़ा दी है। दो नर्सों के संक्रमित पाए जाने के बाद प्रशासन ने युद्ध स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी है। अब तक इन नर्सों के संपर्क में आए 120 लोगों की पहचान कर उन्हें 21 दिनों के एहतियाती क्वारंटीन में भेज दिया गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से फोन पर बात कर हालात का जायजा लिया है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के दौरान नदिया, कटवा और बर्धमान सहित कई इलाकों में जाल बिछाया गया है। क्वारंटीन किए गए 120 लोगों में 4 नर्स, 2 डॉक्टर और एक एम्बुलेंस चालक भी शामिल हैं, जिन्होंने प्राथमिक उपचार के दौरान संक्रमित नर्सों की देखभाल की थी। संपर्क की कडिय़ां कटवा महकुमा अस्पताल, बर्धमान मेडिकल कॉलेज और बारासात के एक निजी अस्पताल से जुड़ी पाई गई हैं।
पूर्व बर्धमान के मंगलकोट स्थित एक संक्रमित नर्स के आवास को पूरी तरह सील कर दिया गया है। इलाके में संक्रमण न फैले, इसके लिए व्यापक स्तर पर सैनिटाइजेशन अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन ने स्थानीय निवासियों से न घबराने और लक्षणों पर नजर रखने की अपील की है। संक्रमितों की पुष्टि के लिए केवल रक्त ही नहीं, बल्कि सीएसएफ (सुषुम्नारस), मूत्र और गले के स्वैब के नमूने भी लिए गए हैं। इन नमूनों का आरटी-पीसीआर टेस्ट किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि निपा एक ‘ज़ूनोटिक’ वायरस है, जिसका मृत्यु दर काफी अधिक होता है, इसलिए जांच में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। निपा के खतरे को देखते हुए भारत सरकार के नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल ने एक नेशनल जॉइंट आउटब्रेक रिस्पॉन्स टीम का गठन किया है। 5 विशेषज्ञों की इस टीम में एम्स कल्याणी और भुवनेश्वर के वरिष्ठ डॉक्टर, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी, पुणे के विशेषज्ञ शामिल हैं। यह टीम राज्य सरकार के साथ मिलकर संक्रमण के स्रोत का पता लगाएगी और रोकथाम की रणनीति तैयार करेगी। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि वे चमगादड़ द्वारा कुतरे गए फल न खाएं और बुखार या सांस लेने में तकलीफ होने पर तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र को सूचित करें।
